{"product_id":"patita-ki-sadhna","title":"Hindi Patita Ki Sadhna\/पतिता की साधना","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eसुनती हूँ, तुमने ब्याह न करने की प्रतिज्ञा कर रखी है।’ नंदा के इस वाक्य पर हरि ने अपनी आँखें नीची करके कहा, ‘असल में बात कुछ और ही है।’\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eनंदा बोली, ‘वही तो मैं जानना चाहती हूँ।’\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eइस पर हरि ने उसकी ओर दृष्टिक्षेप किया, उससे दोनों के नयन लालसा के आलिंगन में चंचल हो उठे और और हरि ने उसे बाहों में भर लिया।\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eमनोवैज्ञानिक विश्लेषण के कुशल हिंदी उपन्यासकार भगवतीप्रसाद वाजपेयी ने इस उपन्यास में एक बाल विधवा के दारुण जीवन का ऐसा मार्मिक चित्र अंकित किया है कि पाठक के सामने उस समय के पूरे भारतीय समाज का चित्र उभर आता है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Prakash Books","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":51540834189629,"sku":null,"price":157.5,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0777\/8100\/8701\/files\/9780143476283.jpg?v=1774900690","url":"https:\/\/99bookstores.com\/products\/patita-ki-sadhna","provider":"99Bookstore","version":"1.0","type":"link"}