{"product_id":"rag-bhairav","title":"RAG BHAIRAV","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eपिता और पुत्री के बीच कितने भी वैचारिक मतभेद हों, लेकिन रक्त संबंध एवं पूर्व जन्म का ऋणानुबंध होने के कारण वे हमेशा एक-दूसरे से निकट ही रहते हैं. . .अपने तो अपने ही होते हैं का अमर संदेश देने वाला नि:संदेह यह एक कालजयी उपन्यास है’— रांगेय राघव\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eभैरव बाबू बोले, ‘अरे मैंने देखा कि उस आदमी को छुरा मार दिया! ख़ून से सना छुरा लेकर लड़का उस गली की तरफ भाग गया।’\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003e‘ज़रूरत क्या है आपको इन सब बातों में उलझने की? बूढ़े आदमी हैं आप। यदि पुलिस आकर हमें परेशान करेगी तब क्या होगा?’\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eविमल मित्र का यह रोचक एवं प्रेरक उपन्यास है, इसमें नई और पुरानी पीढ़ी के टकराव को जीवंत ढंग से उकेरा गया है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Prakash Books","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":51540834025789,"sku":null,"price":179.1,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0777\/8100\/8701\/files\/9780143476320.jpg?v=1774900683","url":"https:\/\/99bookstores.com\/products\/rag-bhairav","provider":"99Bookstore","version":"1.0","type":"link"}