{"product_id":"sabrang-mohbhang","title":"Hindi SABRANG MOHBHANG","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003e“तोड़ दो अपने घेरे को! रुककर देखो, कौन दौड़ा जा रहा है? बीच में कौन है? इस खेल का अंत कहाँ है? अपने-आपसे प्रश्न करो―जाना कहाँ है? ऐसा क्यों है? यह हो क्या रहा है? हमसे कराया क्यों जा रहा है? हे माँ! हमें शिव का मस्तिष्क दो, कृष्ण का हृदय दो, राम का कर्म दो, गांधी का सत्य दो!”\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eअपनी ही संस्कृति को जीर्ण पुरातन कहकर त्याग फेंकने वाले भारतीयों का पश्चिम के प्रति हो रहे मोह को भंग करने वाला अत्यंत विचारोत्तेजक तथा मनोरंजक नाटक दिया गया है इस पुस्तक में।\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eआज के नाटककारों की अगली पंक्ति के बहुचर्चित नाटककार लक्ष्मीनारायण लाल की यह नाट्यकृति कई पुरस्कारों से सम्मानित की जा चुकी है।\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eयह आधुनिक हिंदी साहित्य का प्रथम संपूर्ण लीला नाटक है, जिसका सफल मंचन नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा द्वारा राजधानी में किया गया। उस मंचन के चित्रों सहित प्रस्तुत है यह नाट्य-साहित्य तथा हिंदी-रंगमंच का गौरवशाली ग्रंथ।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Prakash Books","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":51540822917437,"sku":null,"price":179.1,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0777\/8100\/8701\/files\/71cJH0pUY4L._SL1500.jpg?v=1774900377","url":"https:\/\/99bookstores.com\/products\/sabrang-mohbhang","provider":"99Bookstore","version":"1.0","type":"link"}