{"product_id":"soordas-paruchay-evam-rachnakar","title":"SOORDAS : PARUCHAY EVAM RACHNAKAR","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eअँखियाँ हरि दरसन की प्यासी।अँखियाँ हरि दरसन की प्यासी।\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eकेसर तिलक मोतिन की माला, वृंदावन के बासी।\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eनेह लगाय त्याग गए तृन सम, डारि गए गल फाँसी।\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eमैया मोरी मैं नहिं माखन खायो।\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eभोर भयो गैयन के पाछे, मधुवन मोहिं पठायो।\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eहड़हड़ाती हुई तूफ़ानी नदी को आधी रात में पार करके कौडिया सर्प को रस्सी समझकर अपनी प्रेमिका तक पहुँचने वाले बिल्वमंगल को उसी के द्वारा धकिया दिया गया, तो मंगल का लुनाई के प्रति अनन्य प्रेम कन्हाई की अनन्य भक्ति में परिवर्तित हो गया और बिल्वमंगल सूरदास हो गए। इन्हीं महाकवि सूरदास की मार्मिक जीवन-कथा के साथ-साथ इस पुस्तक में उनके भजनों तथा भ्रमर-गीतों को शामिल किया गया है। भक्ति-रस और भाव से शराबोर इस पुस्तक का संपादन किया है सुप्रसिद्ध लेखक सुदर्शन चोपड़ा ने।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Prakash Books","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":51540823572797,"sku":null,"price":179.1,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0777\/8100\/8701\/files\/81UC7Hr5HKL._SL1500.jpg?v=1774900404","url":"https:\/\/99bookstores.com\/products\/soordas-paruchay-evam-rachnakar","provider":"99Bookstore","version":"1.0","type":"link"}